Tuesday, 13 January 2015

मकर संक्रांति : सूर्यदेव के उत्तरायण का महापर्व

मकर संक्रांति : मकर संक्रांति का राष्ट्रव्यापी पर्व मूलतः सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश की पूजा है। यह सूर्य पर्व है, जिसकी आराधना का मूल उद्देश्य आत्मजागृति है। प्राचीन काल की परंपराओं के अनुसार मकर संक्रांति प्रति वर्ष 14 जनवरी को पड़ती है। हिंदी कैलेंडर एवं पंचांग के महीनों के अनुसार यह तिथि पौष या माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ती है। 

मकर संक्रांति की रंगोली देखिये इस लिंक में - 
http://www.bhojpurinama.com/trendsplay/EGsNOImsQQc/Rangoli-Makar-Sankranti-Special
14 जनवरी को सूर्य प्रति वर्ष धनु राशि का भ्रमण पूर्ण कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकरराशि बारह राशियों में दसवीं राशि होती है। संक्रांति का अर्थ है बदलाव का समय। संक्रांति उस काल को या तिथि को कहते हैं, जिस दिन सूर्य एक राशि में भ्रमण पूर्ण कर दूसरी राशि में प्रवेश करता है। इसे पुण्यकाल माना जाता है और संक्रमण काल के रूप में भी स्वीकार किया जाता है। वैज्ञानिक स्तर पर यह पर्व एक महान खगोलीय घटना है और आध्यात्मिक स्तर पर मकर संक्रांति सूर्यदेव के उत्तरायण में प्रवेश की वजह से बहुत महत्वपूर्ण बदलाव का सूचक है। सूर्य 6 माह दक्षिणायन में रहता है और 6 माह उत्तरायण में रहता है।

मकर संक्रांति की एक झलक देखिये -
http://www.bhojpurinama.com/trendsplay/BdDMetypsBg/happy-makar-sankranti

सूर्यदेव के उत्तरायण का महापर्व : महाभारत युग की प्रामाणिक आस्थाओं के अनुसार सर्वविदित है कि उस युग के महान नायक भीष्म पितामह शरीर से क्षत-विक्षत होने के बावजूद मृत्यु शैया पर लेटकर प्राण त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश का इंतजार कर रहे थे। 
भीष्म ने इच्छा-मृत्यु का वर प्राप्त कर लिया था। ऐसी भी मान्यता है कि सूर्य के उत्तरायण में होने का अर्थ मोक्ष के द्वार खुलना है। जुलियन कैलेंडर के अनुसार तो लगभग 23 दिसंबर से ही उत्तरायण सूर्य के योग बन जाते हैं, परंतु भारतीय पंचांगों के अनुसार यह तिथि 14 जनवरी को ही आती है। 
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार उत्तरायण के सूर्य के 6 माहों में देवताओं का एक दिन पूर्ण होता है और दक्षिणायन के सूर्य में उनकी एक रात पूरी होती है। इसी के साथ यह भी विश्वास जुड़ा है कि जो लोग उत्तरायण के सूर्य में प्राण त्यागते हैं उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है और जो लोग दक्षिणायन के सूर्य में मृत्यु को प्राप्त होते हैं उन्हें पुनर्जन्म लेना पड़ता है। इसलिए सूर्य के उत्तरायण को संसार में जन्म-मृत्यु के आवागमन से मुक्ति का मार्ग भी मानते हैं।
उत्तरप्रदेश में मकर संक्रांति को खिचड़ी संक्रांति के नाम से मनाया जाता है। महाराष्ट्र अंचल में तिल-गुड़ के साथ मकर संक्रांति पर्व मनाने का रिवाज है। गुजरात में इस दिन दान-धर्म के कार्यक्रम होते हैं। खिचड़ी का दान किया जाता है और फिर स्वयं के लिए उपयोग किया जाता है। पूर्वी राज्यों में भी मकर संक्रांति पर्व से जनता अच्छी तरह वाकिफ है। इस पर्व पर गुजरात में तो व्यापक स्तर पर पतंगबाजी के मुकाबले आयोजित किए जाते हैं। 
पतंगबाजी की लोकप्रियता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि गुजरात में इस पर्व के अवसर पर लगभग दो करोड़ रुपए का पतंग का व्यवसाय होता है। इसी मकर संक्रांति के पर्व को तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश में पोंगल पर्व के रूप में मनाते हैं। 


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Friday, 9 January 2015

भोजपुरी सिनेमा की नूतन वर्ष में अच्छी शुरुआत

भोजपुरी सिनेमा की नूतन वर्ष में अच्छी शुरुआत हुई है. नये साल में जो भी फिल्में बिहार और मुंबई में प्रदर्शित हो रही हैं सभी फिल्मों को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है. नववर्ष के दूसरे शुक्रवार को बिहार में सईयां तूफानी और मुंबई व गुजरात में दिल भईल दिवाना का सफल प्रदर्शन हुआ है. सबसे बड़ी बात यह है कि दोनों फिल्मों की नायिका भोजपुरी सिनेमा की स्टार अभिनेत्री मोनालिसा हैं. सईयाँ तूफानी में विक्रांत सिंह और मोनालिसा हीरो हीरोइन हैं वहीं दिल भईल दिवाना में मुख्य नायक नायिका विराज भट्ट, मोनालिसा, अरविन्द अकेला कल्लू, अर्चना सिंह, निशा दूबे हैं.

सँईया तूफानी की शूटिंग देखिये इस लिंक में - 
http://www.bhojpurinama.com/video/making-of-upcoming-movie-saiya-tufani-with-monalisa

सँईया तूफानी : इस फिल्म में भोजपुरी में जबर्दस्त एक्शन के पर्याय बने विक्रांत सिंह और हॉट गर्ल मोनालिसा की रोमांटिक जोड़ी है। त्रिशाँत ग्रुप के बैनर तले निर्माता उमेश देसाई व निर्देशक अजय झा की इस फिल्म के संगीतकार अमन श्लोक , गीतकार व लेखक अरविन्द तिवारी हैं।

दिल भईल दिवाना का गीत रिकॉर्डिंग के समय डांस देखिये इस लिंक में -
http://www.bhojpurinama.com/video/kaluaa-dancing-with-hot-actress

दिल भईल दिवाना : प्रियांसी मूवी कृत भोजपुरी फिल्म दिल भईल दिवाना का प्रदर्शन आज मुंबई और गुजरात में जोर शोर से किया जा रहा है। निर्माता व निर्देशक अरविन्द चौबे की यह फिल्म दर्शकों को बहुत पसंद आने वाली है। इस फिल्म के सह निर्माता निराला फिल्म्स हैं। मुख्य कलाकार - विराज भट्ट, मोनालिसा, अरविन्द अकेला कल्लू, अर्चना सिंह, निशा दूबे, प्रियंका पंडित, संजय पाण्डेय, अरुण सिंह, जसवंत कुमार, अनूप अरोरा, माया यादव, विनोद मिश्रा, अलोक यादव, सीमा सिंह इत्यादि हैं तथा मेहमान भूमिका में दीपक भाटिया हैं। संगीत - अविनाश झा, गीत - प्यारे लाल यादव, कृष्णा बेदर्दी, आर आर पंकज व मनोज मतलबी, लेखक - लालजी यादव, छायांकन - रवि चन्दन, संकलन - जीतेन्द्र सिंह (जीतू), मारधाड़ - दिलीप यादव, नृत्य निर्देशन - कानू मुखर्जी व संजय कोर्बे का है।

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Tuesday, 6 January 2015

भोजपुरी सिनेमा के अनछुए पहलू : इतिहास जानने की उत्सुकता

भोजपुरी सिनेमा के अनछुए पहलू पर जितना ही प्रकाश डाला जा रहा है उतना ही इतिहास जानने की उत्सुकता बढ़ती ही जा रही है। पहली भोजपुरी फिल्म गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो की निर्माण का  घटना क्रम, फिल्म की शूटिंग, फिल्म का प्रीमियर तथा प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा प्रोत्साहन आदि बहुत से रोमांचक घटनाओं का ज्ञानवर्धक वर्णन मिलता है। भोजपुरी माटी की महक को जन जन तक पहुँचाने के लिए तत्पर भोजपुरी सिनेमा का इकलौता वेब पोर्टल www.bhojpurinama.com (भोजपुरीनामा डॉट कॉम) के जरिये भोजपुरी सिनेमा के अनछुए पहलुओं को सार्वनजिक करने का अथक प्रयास किया जा रहा है।
( महानायक कुणाल सिंह यादव और भोजपुरीनामा प्रतिनिधि रामचन्द्र यादव )
इस भगीरथ प्रयास में भोजपुरी सिनेमा के  पहले सुपर स्टार और महानायक *कुणाल सिंह यादव*  ने तहेदिल से मार्गदर्शन किया है। इन्होंने भोजपुरी सिने जगत में भोजपुरी फिल्म धरती मईया  से अपनी फ़िल्मी पारी शुरू किया था। सन १९८० ई० और सन १९९० ई०  तक के दो दशक तक अकेले सुपर स्टार रहकर महानायक का ख़िताब हासिल किया है। यह भोजपुरी सिनेमा के लिए गौरव बात है। ये आज भी भोजपुरी सिनेमा के लिए जीते हैं और भोजपुरी सिनेमा की प्रगति के लिए हर संभव सहयोग के लिए तैयार रहते हैं।

भोजपुरी फिल्म धरती मईया का गीत देखिये इस लिंक में - 



(वरिष्ठ अभिनेता बृजेश त्रिपाठी और भोजपुरी नामा प्रतिनिधि रामचन्द्र यादव) 
 भोजपुरी सिनेमा के हर सुखद व दुखद स्थिति-परिस्थिति को आत्मसात किये हुए संघर्षशील वरिष्ठ अभिनेता बृजेश त्रिपाठी की अहम भूमिका है भोजपुरी सिनेमा के अनछुए पहलु को प्रस्तुत करने में। बृजेश त्रिपाठी की पहली भोजपुरी फिल्म सईया तोरे कारन का प्रदर्शन सन (१९७९) में  हुआ।  राकेश पाण्डेय, पदमा खन्ना नायक नायिका थे और बृजेश त्रिपाठी ने गाँव का गुण्डा का किरदार निभाया था। निर्माता धनेश्वर सिंह तथा निर्देशक शर्मा जी थे। संगीत चित्रगुप्त का था। इन्होंने अब तक बहुत सी फिल्मों भोजपुरी फिल्मों अभिनय किया है और अनवरत सक्रीय हैं। इनसे सिने जगत का अब तक इतिहास जानकर बहुत ही प्रेरणा मिली। इनको शुरू से अब तक के सिनेमा सफर दिन तारीख और सन आदि सब मुँह जबानी याद है। 



सुपर हिट भोजपुरी फिल्म चल सखी दूल्हा देखी (१९९४) (कलाकार कुणाल सिंह, सुनैना, के के गोस्वामी, गोपाल राय, हरी शुक्ला, युनिश परवेज़, बीना राय, सत्येन कप्प्पू, रमेश आनंद) के निर्माता विजय यादव जो अब फिल्म वितरक भी हैं, ने भोजपुरी सिनेमा के बारे में ढेर सारी जानकारी देकर बहुत सहयोग किया है। 
इसी तरह से और भी कई महान हस्तियों से हम आप सभी से परिचय करवाते रहेंगे। आप सब ऐसे ही हमारे साथ जुड़े रहिये।


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Friday, 2 January 2015

नव वर्ष : पूरे विश्व में अलग-अलग तिथियों तथा विधियों से मनाया जाता है



नव वर्ष  की शुरुआत नई उम्मीद, नया जोश, उत्साह और नया संकल्प के साथ की जाती है. १ जनवरी को नया साल एक उत्सव की तरह पूरे विश्व में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग तिथियों तथा विधियों से मनाया जाता है। विभिन्न सम्प्रदायों के नव वर्ष समारोह भिन्न-भिन्न होते हैं और इसके महत्त्व की भी विभिन्न संस्कृतियों में परस्पर भिन्नता है।
हिन्दू नवर्ष : चैत्र महीने से पहले दिन से नया साल मनाया जाता है. ३१ दिसंबर की शाम की तरह होलिका दहन उत्सव फाल्गुन माह की अंतिम रात को मनाया जाता है और चैत्र माह के पहले दिन रंगों का त्यौहार होली पर्व मनाया जाता है.
इस्लामिक नववर्ष : इस्लामिक कैलेंडर का नया साल मुहर्रम होता है। इस्लामी कैलेंडर एक पूर्णतया चन्द्र आधारित कैलेंडर है जिसके कारण इसके बारह मासों का चक्र ३३ वर्षों में सौर कैलेंडर को एक बार घूम लेता है। इसके कारण नव वर्ष प्रचलित ग्रेगरी कैलेंडर में अलग अलग महीनों में पड़ता है। 

नववर्ष का वीडियो देखिये इस लिंक में - 
http://www.bhojpurinama.com/trendsplay/oEPotH3EXbk/Happy-New-Year-

पश्चिम नववर्ष :  नव वर्ष उत्सव ४००० वर्ष पहले से बेबीलोन   में मनाया जाता था। लेकिन उस समय नए वर्ष का ये त्यौहार २१ मार्च  को मनाया जाता था जो कि वसंत के आगमन की तिथि भी मानी जाती थी।
प्राचीन रोम में भी नव वर्षोत्सव के लिए चुनी गई थी। रोम के तानाशाह जूलियस सीजर  ने ईसा पूर्व ४५वें वर्ष में जबजूलियन कैलेण्डर की स्थापना की, उस समय विश्व में पहली बार १ जनवरी  को नए वर्ष का उत्सव मनाया गया। ऐसा करने के लिए जूलियस सीजर को पिछला वर्ष, यानि, ईसापूर्व ४६ इस्वी को ४४५ दिनों का करना पड़ा था।

नया साल खुशियों का त्यौहार देखिये इस लिंक में -
http://www.bhojpurinama.com/trendsplay/ObYrbJU95VU/Happy-New-Year-

हिब्रू नववर्ष : हिब्रू मान्यताओं के अनुसार भगवान द्वारा विश्व को बनाने में सात दिन लगे थे। इस सात दिन के संधान के बाद नया वर्ष मनाया जाता है। यह दिन ग्रेगरी के कैलेंडर के मुताबिक ५ सितम्बर से ५ अक्टूबर के बीच आता है।
आइये जानते हैं भारत के सभी राज्यों में कब मनाया जाता है नववर्ष :

भारत  के विभिन्न हिस्सों में नव वर्ष अलग-अलग तिथियों को मनाया जाता है। प्रायः ये तिथि मार्च और अप्रैल के महीने में पड़ती है।पंजाब  में नया साल बैशाखी  नाम से १३ अप्रैल को मनाई जाती है। सिख  नानकशाही कैलंडर के अनुसार १४ मार्च होला मोहल्ला नया साल होता है। इसी तिथि के आसपास बंगाली तथा तमिळ नव वर्ष भी आता है। तेलगु नया साल मार्च-अप्रैल के बीच आता है। आंध्रप्रदेश में इसे उगादी (युगादियुग + आदि का अपभ्रंश) के रूप में मनाते हैं। यह चैत्र महीने का पहला दिन होता है। तमिल नया साल विशु १३ या १४ अप्रैल को तमिलनाडु  और केरल  में मनाया जाता है। तमिलनाडु में पोंगल  १५ जनवरी को नए साल के रूप में आधिकारिक तौर पर भी मनाया जाता है। कश्मीरी कैलेंडर नवरेह १९ मार्च को होता है। महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा  के रूप में मार्च  अप्रैल के महीने में मनाया जाता है, कन्नड नया वर्ष उगाडी कर्नाटक के लोग चैत्र माह के पहले दिन को मनाते हैं, सिंधी उत्सव चेटी चंड  उगाड़ी और गुड़ी पड़वा एक ही दिन मनाया जाता है। मदुरै  में चित्रैय महीने में चित्रैय तिरूविजा नए साल के रूप में मनाया जाता है। मारवाड़ी  नया साल दीपावली  के दिन होता है। गुजराती  नया साल दीपावली के दूसरे दिन होता है जो अक्टूबर या नवंबर में आती है। बंगाली नया साल पोहेला बैसाखी १४ या १५ अप्रैल को आता है। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश  में इसी दिन नया साल होता है। 

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Wednesday, 31 December 2014

भोजपुरी सिनेमा के दूसरे दौर के अनछुए पहलू - भाग ४ : सन १९९० से २००० तक

भोजपुरी सिनेमा का दूसरा दौर में १९९० से २००० सन तक की भोजपुरी फिल्मों का उल्लेख और अनछुए पहलु पर चर्चा कर रहे हैं. यह दशक भोजपुरी फिल्मों के अनुकूल नहीं था. बहुत  सी फिल्मों का निर्माण हुआ मगर बहुत कम ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल हुई. कुछ फिल्में ठीक से प्रदर्शित नहीं हो पायी.

एक नज़र सन १९९० से २००० तक की भोजपुरी फिल्मों पर :-
हमार बेटवा (१९९०) कलाकार  कुणाल सिंह, जमुना, बृजेश  त्रिपाठी, संजीवनी, मधु मिश्रा. निर्माता किशोर कुमार, निर्देशक अब्बास, संगीतकार चित्रगुप्त. माई (१९९१) कलाकार पदमा खन्ना, पंकज शर्मा, निर्माता रामबाबू यादव, निर्देशक राजकुमार शर्मा. उधार की बेटी (१९९१) कलाकार कुणाल सिंह, सोना, निर्देशक चन्द्र भूषण मणि (निर्देशक चन्द्र भूषण मणि की बतौर निर्देशक यह पहली भोजपुरी फिल्म थी). कजरी (१९९१) निर्देशक किरणकान्त वर्मा. हो जाई  द नैना चार (१९९२), राम जईसन भईया हमार (१९९३), कब अईहैं दूल्हा हमार (१९९३) कलाकार कुणाल सिंह, आँचल, विजय, निर्माता उदय शंकर, निर्देशक नवीन जोशी.


बैरी कँगना का सुपर हिट गीत देखिये इस लिंक में - 
http://www.bhojpurinama.com/trendsplay/7nKgPwZd-EU/JHUMAKA-MORA-GADHI-DE-RE-SONARA-MPG

बैरी कँगना (१९९३) कलाकार कुणाल सिंह, मीरा माधुरी, राकेश पाण्डेय, ब्रज किशोर, गोपाल राय, निर्देशक निहाल सिंह. जुग जुग जिया मोरे लाल (१९९३) निर्माता दिलीप जयसवाल. लागल चुनरी में दाग (१९९४), चल सखी दूल्हा देखी (१९९४) कलाकार कुणाल सिंह, सुनैना, के के गोस्वामी, गोपाल राय, हरी शुक्ला, युनिश परवेज़, बीना राय, सत्येन कप्प्पू, रमेश आनंद, निर्माता विजय यादव, अरविन्द श्रीवास्तव, निर्देशक राजू सिंह, संगीतकार सुरेन्द्र कोहली, गीतकार अशोक घायल. ( के के गोस्वामी और अशोक घायल की पहली भोजपुरी फिल्म थी यह). बटोहिया (१९९५) राकेश पाण्डेय, मीरा माधुरी, बृजेश त्रिपाठी, निर्माता भरत सिंह, निर्देशक देवा. पलना में झूले ललना (१९९५) राकेश पाण्डेय, पदमा खन्ना, बृजेश त्रिपाठी, निर्माता अरविन्द गुप्ता, निर्देशक देवा. दूल्हा दुल्हन (१९९६) कलाकार कुणाल सिंह, शकीला माजिद, निर्माता टी पी वर्मा, निर्देशक नवीन जोशी.
घर अँगना (१९९६) कलाकार कुणाल सिंह, अभिषेक चड्ढा, आँचल. साथ हमार तोहार (१९९६) कलाकार कुणाल सिंह, निर्देशक अशोक चतुर्वेदी. महुआ (१९९६) कलाकार विजय राणा, मीरा माधुरी, निर्माता अनिल राणा,  निर्देशक आकाश योगी.  हे तुलसी मईया (१९९७) पदमा खन्ना, विजय खरे, निर्देशक पदमा खन्ना. झुमकी (१९९७). सात फेरे (१९९७) कलाकार कुणाल सिंह, सुनैना, दारा सिंह, निर्माता संजय जयसवाल, निर्देशक निर्देशक राजू सिंह. (दारा सिंह की पहली भोजपुरी फिल्म थी यह). नईहर की चुनरी (१९९७) कलाकार ललितेश झा, सुनैना, निर्देशक लालजी यादव. बैरी सजना (१९९८) कुणाल सिंह, मीरा माधुरी, निर्माता प्रहलाद दास गुप्ता, निर्देशक राजू सिंह. माई के लाल (१९९८) दीप श्रेष्ठ, आँचल, निर्माता दीप श्रेष्ठ, निर्देशक सुनील सिन्हा. पैजनिया (१९९८) निर्माता मोटू असलम, निर्देशक असलम शेख.

नोट : अब तक इतनी भोजपुरी फिल्मों का विवरण मिल सका है. कुछ फिल्मों पूरा विवरण नहीं मिल सका है. आप सबसे अनुरोध है कि आप सबके पास कोई जानकारी हो तो कृपया कमेन्ट में साँझा करें.

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Saturday, 27 December 2014

भोजपुरी सिनेमा के दूसरे दौर के अनछुए पहलू भाग 3

भोजपुरी सिनेमा का दूसरा दौर जितना रोचक है उससे कहीं ज्यादा ज्ञानवर्धक भी है. आज हम चर्चा कर रहे हैं १९८० से १९९० तक भोजपुरी फिल्मों का सफ़र और उनके अनछुए पहलुओं पर.

भोजपुरी फिल्म गंगा किनारे मोरा गाँव का एक गीत इस लिंक में - 


फिल्म धरती मईया (१९८१) राकेश पाण्डेय, पदमा खन्ना, कुणाल सिंह, श्री गोपाल, गौरी खुराना आदि स्टारर निर्माता अशोक चन्द जैन तथा निर्देशक कमर नार्वी थे. संगीतकार थे चित्रगुप्त.

 सन १९८२ में राजश्री प्रोडक्शंन के बैनर तले केशव प्रसाद मिश्र  के उपन्यास 'कोहबर की शर्त' पर आधारित फिल्म 'नदिया के पार' प्रदर्शित गई।  जो  काफी सराही गयी और सफलता के कीर्तिमान भी रचा। फिल्म के लेखक व निर्देशक गोविन्द मुनीस थे। यह  फिल्म सभी तरह के लोगो को पसंद आई। इस फिल्म मुख्य कलाकार सचिन, साधना सिंह, इन्दर ठाकुर, मिताली, सविता बज़ाज़, शीला डेविड, लीला मिश्रा, सोनी राठौड़ थे।
फिल्म बसुरिया बाजे गंगा तीर (१९८३) राकेश पाण्डेय, प्रेमा नारायण, पदमा खन्ना, बृजेश त्रिपाठी तथा भूषण तिवारी. गंगा किनारे मोरा गाँव (१९८३) कुणाल सिंह, गौरी खुराना, निर्माता अशोक चन्द जैन, निर्देशक दिलीप बोस, संगीतकार चित्रगुप्त. यह फिल्म भोजपुरी सिनेमा की ब्लाक बस्टर फिल्म थी. भोजपुरी को बहुत ऊँचा  मुकाम दिया था. बैरी सावन (१९८४) सुजीत कुमार, रजनी शर्मा, अरुण प्रभात तथा बृजेश त्रिपाठी. निर्माता राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, निर्देशक प्रेम सिंह, संगीतकार श्याम सागर थे. इस फिल्म से मशहूर गीतकार समीर को पहला ब्रेक मिला था. उनका एक गीत लिया गया था बाकी के गीत अन्जान ने लिखा था. गौरतलब हो कि संगीतकार चित्रगुप्त के सभी गीतों को अन्जान ने लिखा था.

देखिये इस लिंक में - आज भी सुपर हिट गीत कवने दिशा में लेके चला रे बटोहिया 
http://bhojpurinama.com/video/kaun-disa-mein-song-of-film-nadiya-ke-paar


दूल्हा गंगा पार के (१९८५) कुणाल सिंह, गौरी खुराना. निर्देशक राजकुमार शर्मा, निर्माता, गीतकार व संगीतकार लक्षमण शाहाबादी थे. यह फिल्म  भी बड़ी हिट थी. गंगा की बेटी (१९८५) सुरेन्द्र पाल, टीना घई, बृजेश त्रिपाठी आदि, निर्माता राम उदार झा, निर्देशक के डी सिंह, संगीतकार ओमकार थे. सजनवा बैरी भईले हमार (१९८६) मनोज वर्मा, दीपिका चिकलिया. निर्माता लाला दमानी, निर्देशक दिलीप बोस तथा संगीतकार चित्रगुप्त थे. पिया टूटे न पिरितिया हमार (१९८६) सुजीत कुमार, पदमा खन्ना, कुणाल सिंह, मनोज वर्मा, बंदिनी मिश्रा, बृजेश त्रिपाठी, बीना बाबा आदि, निर्माता राम उदार झा (जवाहर सिनेमा के मालिक) निर्देशक के डी सिंह, गीतकार समीर तथा संगीतकार ओमकार थे.
बिहारी बाबू (१९८७) शत्रुघ्न सिन्हा, कुणाल सिंह. निर्माता पवन कुमार, संगीतकार चित्रगुप्त थे. घर गृहस्थी (१`९८८) राकेश पाण्डेय, सुजीत कुमार, रेखा सहाय, बृजेश त्रिपाठी. निर्माता बाबू भाई, निर्देशक दिलीप बोस तथा संगीतकार चित्रगुप्त थे. इसी साल पिया की प्यारी एवं सेन्हुर का भी प्रदर्शन हुआ था.

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Tuesday, 23 December 2014

भोजपुरी फिल्म अवार्ड 2014 का आँखों देखा बयान : भोजपुरी बोली नदारद

16 दिसंबर मंगलवार की शाम मुंबई के उपनगर अँधेरी (पश्चिम) वीरा देसाई रोड पर स्थित कंट्री क्लब में विनोद गुप्ता द्वारा ब्लॉक बस्टर भोजपुरी फिल्म अवार्ड - 2014 का आयोजन किया गया. कुछ बुलाये और हम जैसे कुछ बिन बुलाये अतिथि पहुंच गए थे. सबसे पहले अभिनेता सुरेन्द्र पाल ने भोजपुरी आवर्ड फंक्शन का संचालन हिंदी में किया. कार्यक्रम का शुरुआत भी श्री गणेश वंदना (मराठी-हिंदी) गीत से किया गया. मुख्य अतिथि के रूप में कांग्रेस प्रवक्ता रशीद अल्वी, कांग्रेस के पूर्व सांसद संजय निरुपम, पूर्व मंत्री कृपाशंकर सिंह, फिल्म निर्माता टी.पी अग्रवाल, अशोक पंडित आदि थे. खलनायक अवधेश मिश्रा का आगमन हिंदी सांग तेरा ही जलवा से हुआ और सुरेन्द्र पाल की जगह मंच संचालन का कार्यभार संभाला.
फिल्म जीना तेरी गली में को हर नॉमनी  में देख कर पूरा मामला फिक्स नजर आया. बिना नॉमनी  के बेस्ट एक्टर और एक्ट्रेस तथा  डायरेक्टर का अवार्ड देना सवालों  के घेरे में है...???
कुछ सवाल और भी उठाये जा रहे हैं, क्या मिल सकेगा इन सवालों का जवाब :-


* ज्युरी मेम्बर का नाम बताया जाय?
* कब और कितनी फिल्मों का नॉमिनेशन किया गया?
* जबकि हर साल 60 से 70 फिल्मों का निर्माण किया जाता है तो फिर कुछ गिनी चुनी फिल्मों तक ही क्यों सिमटा रहा यह भोजपुरी फ़िल्म अवार्ड?
* मापदंड क्या है नॉमिनेशन का ?

ब्लॉक बस्टर भोजपुरी फिल्म अवार्ड -2014 में कोई भी ब्लॉक बस्टर फिल्म शामिल ही नहीं थी.  इस साल की सबसे बड़ी फिल्म निरहुआ हिंदुस्तानी रही है दिनेश लाल यादव निरहुआ की तारीफ भी हुई फिर भी रवि किशन को अवार्ड...???  जबकि  इस साल रवि किशन की कोई फिल्म अच्छी नही चली एक औसत दर्जे तक रही. सूत्रों से मिली जानकारी  के अनुसार समारोह के आयोजक विनोद गुप्ता ने फूहड़ न्यूकमर अभिनेत्री को कहा कि आप तो फ़ोन रिसीव ही नही करती हो नही तो आप ही को प्रियंका पंडित के जगह अवार्ड दे देता.  इस मामले से पूरा आयोजन ही फिक्स नजर आता है.
दिनाँक 20.12.2014 की सुबह 7.21am को अभिनेत्री प्रियंका पंडित ने मधुप श्रीवास्तव के फेसबुक इनबॉक्स में मैसेज किया कि यह अवार्ड 2013 की  फिल्मों का था. जबकि आयोजक विनोद गुप्ता ने ना ही मिडिया को और ना ही फिल्म प्रचारको को यह बताया कि अवार्ड 2013 का है या  2014 का है तथा कब होगा और कहाँ होगा इसकी भी जानंकारी नहीं दी गई. 
नोट : इस अवार्ड समारोह में भोजपुरी फिल्म के सभी पी. आर. ओ. (फिल्म प्रचारक) को आमंत्रित नहीं किया गया. भोजपुरी फिल्म पत्रिका और भोजपुरी फिल्म संवाददाता को भी वंचित रखा गया जबकि किसी भी फिल्म के मुहूर्त से लेकर फिल्म के प्रदर्शन के बाद तक की सभी खबरें हर जगह पहुँचाने में फिल्म प्रचारक, फिल्म पत्रिका और संवाददाता की अहम भूमिका होती है.

1). बेस्ट पब्लिसिटी अवार्ड - नरसू (बिना नॉमनी घोषित किये हुए).

2). बेस्ट एक्शन - वेंकेट, फिल्म टाईगर ( शंकर वोहरा निर्मता के हाथ से)
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
टाईगर
छपरा एक्सप्रेस
दूल्हे राजा
शेरनी
जीना तेरी गली में

3). बेस्ट एडिटर -कोमल वर्मा, फिल्म-बनारसवाली (सम्मान उमेश कोहली ने दिया)
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
बनारसवाली
धुरंधर
टाईगर
जीना तेरी गली में
संसार

4).बेस्ट आर्ट डायरेक्शन - शकील शेख, फिल्म दबंग मोरा बलमा (अभिनेता बृजेश त्रिपाठी के हाथ से)
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
फूहड़ सिनेमा
दूल्हे राजा
दबंग मोरा बलमा
साली बड़ी सतावेली
रखवाला

इसके बाद अभिनेत्री संगीता तिवारी और गायक व  अभिनेता राकेश मिश्रा का स्टेज प्रोग्राम ( गदरल जवानी मोरी बनारस के पान, आरा के पारा चढ़ल सीवान के पान ... आदि )

5). बेस्ट सिनेमोटोग्राफर - फ़िरोज़ खान, फिल्म- जीना तेरी गली में ( पूर्व सांसद संजय निरुपम के हाथ से)
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
जीना तेरी गली में
टाईगर
प्यार झुकता नही
प्रेम दीवानी

6). बेस्ट Audioghraphy - अविनाश फिल्म- धुरंधर (फिल्म के डायरेक्टर दीपक तिवारी ने पूर्व मंत्री कृपाशंकर सिंह के हाथ से लिया)
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
बनारसवाली
धुरंधर
रखवाला
लक्ष्मण रेखा
छपरा एक्सप्रेस

7). बेस्ट स्टोरी- धर्मेन्द्र नाथ, फिल्म- लक्ष्मण रेखा (व्यवसाई राहुल कपूर के हाथ से)
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
बनारसवाली
जीना तेरी गली में
लक्ष्मण रेखा
संसार
साली बड़ी सातवेली

8). बेस्ट स्क्रीनप्ले- असलम शेख, फिल्म रखवाला (उद्योगपति जय किशन के हाथ से)
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
जीना तेरी गली में
रखवाला
संसार
लक्ष्मण रेखा
छपरा एक्सप्रेस

इसके बाद कॉमेडियन मनोज टाईगर का आगमन और अपने कॉमेडी से खूब गुदगुदाया.

9). बेस्ट डॉयलॉग्स- सुरेन्द्र मिश्रा (आरडीसी गुप्ता MTNL के हाथो)
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
जीना तेरी गली में
रखवाला
संसार
धुरंधर
प्यार झुकता नहीं 

10).बेस्ट गीतकार - प्यारे लाल यादव कवि, फिल्म- संसार (निर्देशक रंजन कुमार सिंह के हाथों निर्माता शंकर रोहरा ने लिया)
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
जीना तेरी गली में
संसार
प्रेम दीवानी
दूल्हे राजा
साली बड़ी सतावेली

11). बेस्ट आइटम डांसर- संवाभना सेठ, फिल्म -बनारसवाली (अभिनेत्री मधु शर्मा के हाथ से)
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
छपरा एक्सप्रेस
रखवाला
बनारसवाली
प्यार झुकता नहीं 
टाईगर

12). बेस्ट म्यूजिक- राजकुमार आर पाण्डेय, फिल्म- जीना तेरी गली में ( संगीतकार रविन्द्र जैन के हाथों से)
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
दूल्हे राजा
जीना तेरी गली में
प्रेम दीवानी
संसार
टाईगर

( इसके बाद अभिनेत्री कृशा खण्डेलवाल ने मज़ा ले ल तू सरक के पजरिया में और हिंदी गीत- तेरे जैसा दुनिया में कोई नही, जिन्हे यार मिले ते मर जावा जैसे गीतों पर परफॉर्म किया)

13). बेस्ट प्लेबैक सिंगर फीमेल- कल्पना, फिल्म- जीना तेरी गली में गीत - गाव गाव सखी मंगल गीत
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
जीना तेरी गली में
प्रेम दीवानी
दबंग मोरा बलमा
दूल्हे राजा
संसार

14). बेस्ट सिंगर मेल- उदित नारायण, फिल्म- दबंग मोरा बलमा (राजेन्द्र गवई के हाथों) दबंग मोरा बलमा  का नाम *नॉमनी में नही था*.
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
जीना तेरी गली में
साली बड़ी सतावेली
संसार
टाईगर
दूल्हे राजा

15). बेस्ट डांस मास्टर- कानू मुखर्जी,फिल्म- जीना तेरी गली में गीत- चंचल पुरवा ( संग्राम शिर्के के हाथों)
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
जीना तेरी गली में
बनारसवाली
साली बड़ी सतावेली
टाईगर
दूल्हे राजा

16). बेस्ट न्यूकमर फीमेल- प्रियंका पंडित, फिल्म-जीना तेरी गली में
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
फूहड़ सिनेमा
जीना तेरी गली में
(अन्य क्लिप तकनीकी खराबी के कारण नहीं दिखाए गए)
17). बेस्ट न्यूकमर - राकेश मिश्रा, फिल्म- प्रेम दीवानी
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
बूटन
प्रेम दीवानी
(अन्य क्लिप तकनीकी खराबी के कारण नहीं दिखाए गए)

18). बेस्ट खलनायक- अवधेश मिश्रा, फिल्म दिलेर ( अभिनेता कुणाल सिंह के हाथों)
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम)
संसार
छपरा एक्सप्रेस
जीना तेरी गली में
लक्ष्मण रेखा
दिलेर

( इसके बाद आइटम डांसर सम्भावना सेठ ने हिंदी गीत राम चाहे लीला चाहे और अन्य हिंदी भोजपुरी गीतों पर परफॉर्म किया) उसके बाद भोजपुरी फिल्म लतखोर का प्रोमो टेलीकास्ट किया गया)

19). बेस्ट सपोर्टिंग फीमेल- माया यादव, फिल्म- संसार ( मेडिकल फील्ड से जुड़े राजेश सिंह के हाथों)
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
संसार
छपरा एक्सप्रेस
जीना तेरी गली में
बनारसवाली
जीना तेरी गली में

20). बेस्ट सपोर्टिंग मेल- कुणाल सिंह, फिल्म-संसार ( संपादक कुमार मोहन के हाथों)
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
संसार
बूटन
प्रेम दीवानी
प्यार झुकता नहीं
रखवाला

21). बेस्ट कॉमेडी- मनोज टाईगर, फिल्म- टाईगर (आर सी गर्ग के हाथों)
नॉमनी .... (सिर्फ फिल्म का नाम) -
प्रेम दीवानी
टाईगर
दूल्हे राजा
दिलेर

(इसके बाद अभिनेता प्रदीप पाण्डेय ने कभी मिलने तो आओ, जरा के जवानी के अंगीठी, और अन्य गीतों पर परफार्म किया)

22). मुख्य अतिथि कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी, टी.पी अग्रवाल और अन्य अतिथि को बुला कर लक्ष्मण रेखा को बेस्ट समाजिक फिल्म का आवर्ड दिया गया.)
23). बेस्ट एक्ट्रेस- रानी चटर्जी, फिल्म- प्रेम दीवानी
नॉमनी
(कोई भी नॉमनी नही दिखाया गया)
24). बेस्ट एक्टर मेल- रवि किशन, फिल्म-धुरंधर
(कोई भी नॉमनी नही दिखाया गया)
25). बेस्ट निर्देशक- राजकुमार आर पाण्डेय, फिल्म- जीना तेरी गली में
(कोई भी नॉमनी नही दिखाया गया)
26). बेस्ट फिल्म- दूल्हे राजा ( अभय सिन्हा)
(कोई भी नॉमनी नही दिखाया गया)
(इसके बाद अभिनेत्री रानी चटर्जी ने ढोढ़ी मुनले रहनी पियरी माटी से और अन्य गीतों पर परफार्म किया)

27). ऑस्कर मूवी चैनल को अवार्ड दिया गया (रोनू मजमूदार के हाथों से)
(इसके बाद अभिनेता रवि किशन ने ये बुची, तमंचे पर डिस्को जैसे गानों पर परफार्म किया).
इति श्री.... साभार : मधुप श्रीवास्तव 


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